Disclaimer/नोट: डॉ बाक़िर मेहदी द्वारा तैयार इस परीक्षण को नेशनल साइकोलॉजिकल कॉर्पोरेशन द्वारा प्रकाशित किया गया है, जिसका T.M. Registration No. 564838 तथा Copyright Registration No. A-73256/2005 है। इच्छुक व्यक्ति परीक्षण से सम्बंधित बुकलेट एवं दिशा-निर्देशिका यहाँ क्लिक करके खरीद सकते हैं। कॉपीराइट पॉलिसी का सम्मान करते हुए बुकलेट एवं दिशा-निर्देशिका को यहाँ प्रकाशित नहीं किया जा रहा है।
रचनात्मकता के परीक्षण का एक निर्धारित मानक या उपकरण नहीं है। विभिन्न सांस्कृतिक सन्दर्भ में इसके विभिन्न प्रासंगिक परीक्षण तैयार किये गए हैं। इस पोस्ट में माध्यमिक विद्यार्थियों में सृजनत्मकता का परीक्षण प्रक्रिया का सारांश प्रस्तुत किया गया है।
प्रस्तावना:
सामान्य भाषा मे, कुछ नया या अलग करने की क्षमता को सृजनत्मकता कहा गया है, परंतु जब तक उस कार्य की उपयोगिता साबित नहीं होती, उसे सृजनत्मकता नहीं माना जाता है। प्रत्येक व्यक्ति में कुछ न कुछ सृजनत्मकता के अंश जरूर पाये जाते हैं। इसमें मौलिकता एवं नवीनता के साथ साथ, उपयोगिता का गुण भी होता है। अभीष्ट परीक्षण के माध्यम से माध्यमिक विद्यार्थियों के मध्य सृजनत्मकता को विभिन्न पहलुओं एवं परिस्थितियों में मापा गया है। इस परीक्षण में प्रश्नों को शाब्दिक एवं अशाब्दिक प्रकृति के आधार पर विभक्त किया गया है। शाब्दिक एवं अशाब्दिक परीक्षण मे कुल 4-4 गतिविधियां शामिल की गयी हैं। प्रत्येक गतिविधि के आधार पर भिन्न-भिन्न समय निर्धारित किए गए। इस परीक्षण में कुल 2 विद्यार्थियों ने भाग लिया। भाषाई कठिनाई को दूर करने के लिए प्रश्नों को हिन्दी तथा अँग्रेजी दोनों मे प्रस्तुत किए गए।
मनोवैज्ञानिक गुण/संप्रत्यय:
सृजनात्मकता एक ऐसी क्रिया है जिसमें मनुष्य अपने मस्तिष्क मे आए विचारों को भिन्न एवं रोचक तरीके से प्रस्तुत करता है। स्टागेनर यह मानता है कि “सृजनत्मकता में पूर्व अथवा आंशिक रूप से नवीन वस्तु का उत्पादन निहित है”। गिलफोर्ड ने इसे क्षमता और उत्पादन दोनों के आधार पर वर्णित किया है। उसके अनुसार, “कभी सृजनात्मकता का अभिप्राय क्षमता से होता है, कभी सृजनतमक रचना से तथा कभी सृजनात्मक उत्पादन से”। यह देखा गया है कि सृजनात्मक प्राणी लक्ष्य निर्देशित व्यवहार करता है तथा उसकी रचना मे एक नवीनता रहती है जो मौलिक, अलग और रोचक होता है। यह भी ध्यान रखना है कि अगर वस्तु या उत्पादन मौलिक, रोचक, अलग के साथ साथ लाभदायक भी होनी चाहिए। सामान्य रूप से देखें तो हम जब किसी वस्तु या घटना को देखते हैं तो हमारे मस्तिष्क में अनेक प्रकार के विचारों का निर्माण होता है। इन्हीं विचारों को जब हम व्यावहारिक रूप प्रदान करते हैं तो इसका पक्ष-विपक्ष, लाभ-हानि हमारे समक्ष आती है। इस स्थिति में हम अपने विचारों की सार्थकता और निरर्थकता को पहचानते हैं तथा सार्थक विचारों को व्यवहार में लाते हैं। इस प्रकार कि स्थिति सृजनात्मक चिंतन कहलती है।
उद्देश्य:
सृजनत्मकता परीक्षण हेतु उपकरण तैयार करने एवं परीक्षण आयोजित करने के निम्नलिखित उद्देश्य हैं:
- शैक्षिक योग्यता वाले विद्यार्थियों की पहचान करना
- प्रतिभा सम्पन्न विद्यार्थियों की पहचान करना
- यांत्रिक व वैज्ञानिक क्षमता वाले विद्यार्थियों की पहचान करना
मनोवैज्ञानिक उपकरण से संबन्धित महत्वपूर्ण तथ्य:
उपकरण को शाब्दिक तथा अशाब्दिक परीक्षण के आधार पर दो भागों में रखा गया है। शाब्दिक परीक्षण के अंतर्गत कुल 4 विभिन्न गतिविधियां हैं जबकि अशाब्दिक गतिविधि के अंतर्गत 3 गतिविधियों को रखा गया है। यह ध्यान रखना होगा कि इस परीक्षण में समय का महत्वपूर्ण स्थान है एवं प्रत्येक गतिविधि के लिए अलग-अलग सामी निर्धारित किए गए हैं। अत: शिक्षक इस बात का ख्याल रखेगा कि कोई भी विद्यार्थी समय से पूर्व कोई दूसरी गतिविधि न प्रारम्भ करे। इसके साथ ही, प्रत्येक गतिविधि से में एक-एक उदाहरण भी दिये गए हैं कि उस गतिविधि को कैसे करना है।
उपकरण को वितरित करने का तरीका:
पूरे परीक्षण को शाब्दिक व अशाब्दिक खंडों मे रखा गया है। शाब्दिक खंडों के कुल 4 गतिविधि शामिल किए गए हैं:
- प्रथम गतिविधि: इसमें तीन असंभव बातों या तथ्यों को शामिल किया गया है जो कभी सत्य नहीं हो सकती है। विद्यार्थियों को केवल यह मानना है कि अगर असंभव परिस्थितियाँ संभव हो जाती है तो क्या परिणाम हो सकते हैं। उदाहरण:
यदि पशु-पक्षी भी मनुष्य समान बोलने लगें तो क्या होगा?
यदि मनुष्य पंक्षी कि भांति उड़ने लगे तो क्या होगा? - दूसरी गतिविधि: इस गतिविधि मे तीन वस्तुओं के नाम दिये गए हैं जिनको कोई नए या विभिन्न तरीकों से प्रयोग किया जाता है। विद्यार्थियों को प्रत्येक के नए नए, विचित्र, तथा रोचक प्रयोग अधिक संख्या में लिखने हैं। इसमें अगर विद्यार्थी नए-नए या असाधारण प्रयोग, जिन्हें आसानी से नहीं सोचा जा सकता है, लिखता है तो इससे विद्यार्थी द्वारा वस्तुओं को नए ढंग से सोचने कि योग्यता ज्ञात होता है। उदाहरण: समाचार-पत्र; इसका उद्देश्य मुख्यत: देश-विदेश की खबरें पाठक तक सूचित करने के लिए है। परंतु एक विद्यार्थी अपने दैनिक जीवन में इसके अलावा भी समाचार पत्र का दूसरे तरीके से भी उपयोग करता है जैसे: धूप से बचने के लिए, लपटने के लिए, गंदे स्थान को साफ करने के लिए आदि। विद्यार्थियों को इसी तरह के उपयोगों की सूची बनानी है। इस गतिविधि के अंतर्गत ‘पत्थर का टुकड़ा’, ‘लकड़ी की छड़ी’ एवं ‘पानी’ वस्तुओं को रखा गया।
- तीसरी गतिविधि: इसमें दो शब्दों या वस्तुओं को जोड़ दिये गए हैं जो आपस मे कई प्रकार से संबन्धित हो सकते हैं। विद्यार्थियों को यह सूची बनानी है कि दिये गए दो वस्तु किस प्रकार से व कितने प्रकार से संबन्धित हो सकते हैं। इससे यह पता चलेगा कि विद्यार्थी कितने नवीन संबंध सोच सकते हैं। इस गतिविधि मे तीन प्रश्नों के लिए कुल 15 मिनट का समय दिया गया। उदाहरण: पेड़ और मकान, कुर्सी और सीढ़ी तथा हवा और पानी।
- चौथी गतिविधि: इस गतिवधि के अंतर्गत विद्यार्थियों के द्वारा घोड़े के खिलौने का परिकल्पना करने के लिए निर्देशित किया गया। उसके बाद विद्यार्थियों को यहा बताया गया कि वे अपने अनुसार उस खिलौने मे जो भी मनोरंजक एवं अनौखा परिवर्तन ला सकते हैं, उन्हें लिखना है। यह भी बताया गया कि परिवर्तन की लागत पर ध्यान नहीं दें। विद्यार्थियों को केवल यह सोचना है कि खिलौने को बच्चों के लिए किस तरह अधिक से अधिक मनोरंजक तथा विचित्र बनाया जा सकता है।
अशाब्दिक खंड में निम्नलिखित गतिविधि शामिल किए :
- पहली गतिविधि: इसमें विद्यार्थियों को दो चित्र प्रदान किए जाएंगे। उन्हें प्रत्येक आकृति को अंग मानकर कोई ऐसा चित्र सोच कर बनाना होगा जो उनके विचार में कोई और नहीं सोच सकता है। चित्र के टुकड़े को किसी भी प्रकार से घुमाया जा सकता है एवं रोचक बनाने के लिए उसमें विद्यार्थी जितनी वस्तुएँ चले जोड़ या घटा सकता है। चित्र पूरा करने के बाद उसे शीर्षक भी प्रदान करना है। इस गतिविधि में कुल 2 प्रश्न है एवं प्रत्येक प्रश्न के लिए 5 मिनट निर्धारित किए गए हैं। उदाहरण:
- दूसरी गतिविधि : इसके अंतर्गत कुल दस अलग अलग आकृतियाँ दी गयी हैं। प्रत्येक आकृति को पूरा करने के लिए विद्यार्थियों को रेखाओं की सहायता से एक ऐसा नवीन व रोचक चित्र बनाना होगा जो उनके विचार मे कोई और नहीं सोच सकता हो। चित्र बनाने के बाद एक रोचक शीर्षक भी देना है। सम्पूर्ण कार्य के लिए 15 मिनट का समय प्रदान किया जाएगा।
- तीसरी गतिविधि: इसमें कुल 12 त्रिभुजाकार एवं वृत्ताकार या अंडाकार आकृतियाँ प्रदान की गयी जिसे विद्यार्थियों द्वारा प्रत्येक आकृति को एक अंग मानकर भिन्न भिन्न रोचक आकृतियों का निर्माण करना होगा जो उनके अनुसार नवीन और रोचक हों। इस बात का ध्यान रखना आवश्यक है कि चित्र किसी बात को स्पष्ट करता हो। सम्पूर्ण कार्य के लिए 10 मिनट का समय दिया गया। उदाहरण:
आंकड़ों के फलांकन का तरीका
शाब्दिक परीक्षण के अंतर्गत गतिविधियों का फलांकन निम्नलिखित आधार पर किया जाएगा:
- धारा-प्रवाहिता: इसका संबंध निर्धारित समय में विभिन्न विचारों के उत्पन्न होने से है। अर्थात निर्धारित समय में जितने उचित या प्रश्न से संबन्धित उत्तर दिये जाएंगे, विद्यार्थी को उतना अंक प्रदान किया जाएगा। सर्वप्रथम, असंबंधित उत्तरों को हटा लेना है, एवं बाकी प्रत्येक उत्तर पर एक अंक दिया जाएगा।
- लचीलापन: इसका तात्पर्य किसी समस्या या परिस्थिति के समाधान के लिए विभिन्न ढंग एवं तरीकों को अपनाने के लिए है। विकल्प एक-दूसरे से इतना भिन्न होंगे, सृजनत्मकता उतनी ही अधिक होगी। इससे यह ज्ञात होता है कि विद्यार्थी किसी समस्या को कितने अलग अलग ढंग के तरीकों को अपना कर समाधान करता है। अर्थात, मान लेते हैं कि प्रथम गतिविधि में एक प्रश्न है कि ‘अगर विद्यालय मे पहिये लग जाए तो क्या होगा’ जिसके उत्तर मे किसी विद्यार्थी ने निम्नलिखित मद लिखे हैं; a) विद्यालय घर आ जाएगा, b) गाड़ी से विद्यालय नहीं जाना होगा, c) स्कूल बस बंद हो जाएंगे, d) पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इस परिस्थिति में विद्यार्थी को गतिविधि के लचीलापन के आधार पर 2 अंक दिये जाएंगे क्योंकि पहले तीन विकल्प लगभग एक ही पृष्ठभूमि अर्थात परिवहन से जुड़े हैं जिसके लिए 1 अंक, तथा अंतिम विकल्प पर्यटन से जुड़ा है, जिसके लिए 1 एक देकर कुल 2 अंक प्रदान किए जाएंगे।
- मौलिकता: मौलिकता का तात्पर्य अनौखेपन से है, अर्थात विचारों कि पूर्णत नवीन अभिव्यक्ति या समस्या का अन्य व्यक्तियों से भिन्न समाधान। उत्तर जितना असाधारण या भिन्न होगा, मौलिकता उतनी अधिक होगी, अत: मौलिकता के अंक भी अधिक मिलेंगे। अगर कोई विकल्प या उत्तर, कुल उपस्थित विद्यार्थियों के 0.1% से 0.99% द्वारा दी जाती है तो उन विद्यार्थियों को उस विकल्प कि मौलिकता के लिए 5 अंक दिये जाएंगे। ठीक इसी प्रकार 1% से 1.99% विद्यार्थियों द्वारा दिये गए। किसी विकल्प को मौलिकता के आधार पर 4 अंक दिया जाएगा। इसी प्रकार, 2% से 2.99%, 3% से 3.99% तथा 4% से 4.99% विद्यार्थियों द्वारा लिखे गए प्रत्येक विकल्प के लिए क्रमश: 3, 2, तथा 1 अंक प्रदान किया जाएगा। अगर किसी विकल्प को 5% से अधिक विद्यार्थियों द्वारा लिखा गया है तो उसे उस विकल्प के लिए कोई भी अंक नहीं दिया जाएगा।
अशाब्दिक परीक्षण मे भी फलांकन को ठीक दो आधार पर किया जाएगा।
- विस्तारण: नए विचारों, भावों कि विस्तृत, व्यापक व गहन प्रस्तुतीकरण करने की क्षमता विस्तरण में आती है। इसमें व्यक्ति नए व ऊंचे विचारों को एक साथ संगठित कर उसका अर्थपूर्ण ढंग से विस्तार करता है, जैसे संक्षिप्त घटना, परिस्थिति को विस्तृत करके प्रस्तुत करने कि क्षमता, किसी अपूर्ण चित्र को पूर्ण करने कि क्षमता, विस्तारण क्षमता को प्रदर्शित करती है। इसमें सबसे पहले यह देखा जाएगा कि विद्यार्थी द्वारा बनाया गया चित्र अर्थपूर्ण है अथवा नहीं। उसके बाद किसी चित्र में बनाए गए आकृति कि पहचान करना है कि वह आकृति किस वस्तु की है। उसके बाद उस वस्तु की उस आकृति के लिए न्यूनतम तथा आवश्यक प्राथमिक अंगों को निर्धारित करना होगा। अगर विद्यार्थी ने इन अंगों या भागों को चित्र मे जोड़ा है तो उसके लिए 1 अंक दिया जाएगा। इसके अलावा चित्र में प्रत्येक नए विचार या भाग के लिए एक अंक दिया जाएगा। उदाहरणस्वरूप, अगर कोई विद्यार्थी किसी चेहरे की आकृति बनाता है तो शिक्षक सबसे पहले उन आधारभूत मानदंडों या अंगों को तय करेगा जिनके बिना किसी चेहरे का चित्र बनाना संभव नहीं। मान लेते हैं शिक्षक ने निर्धारित किया कि चेहरे के लिए दो आँख, नाक, कान, भौएँ का होना आवश्यक है। अगर विद्यार्थी द्वारा बनाए गए चित्र में ये सभी हैं तो इन प्राथमिक भागों के लिए उसे एक अंक दिया जाएगा। इसके आलवे उसने अगर चेहरे पर झुर्रियां, दाढ़ी-मूछें आदि बनाया है तो प्रत्येक नए विचार या अंग के लिए 1 अंक दिया जाएगा।
- मौलिकता: इसके अंतर्गत मौलिकता का आंकलन भी लगभग पहले परीक्षण जैसा ही होगा। सिर्फ इस बात का ध्यान रखना है कि विस्तारण के अंतर्गत निर्धारित किए गए प्राथमिक मानदंडों या अंगों को मौलिकता से भी देखना है। इसके अलावा प्रत्येक विचार का वर्गीकरण एवं फलांकन शाब्दिक परीक्षण के अनुसार ही होगा।
प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण
परीक्षण के आधार पर दो विद्यार्थियों द्वारा निम्नलिखित परिणाम प्राप्त हुए। इससे पूर्व प्रत्येक गतिविधि पर पृथक रूप से धारा-प्रवाहिता, लचिलापन एवं मौलिकता के आधार पर अंक प्रदान किए गए तथा बाद में उनका योग निकाला गया।
महेश ने शाब्दिक परीक्षण मे कुल 65 अंक प्राप्त किए जबकि अशाब्दिक परीक्षण में कुल 59 अंक प्राप्त किए।
References:
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APA: Pati, S. (2022, March 4). सृजनात्मकता परीक्षण. सृजनात्मकता. https://creativitymgahv.blogspot.com/2022/03/disclaimer-t.html
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